Essay on Raksha Bandhan in Hindi – रक्षा बंधन पर निबंध

Essay on Raksha Bandhan in Hindi – रक्षा बंधन पर निबंध

Raksha Bandhan Essay in Hindi

रक्षा बंधन भारत का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है, यह त्यौहार भारत के हर घर में मनाया जाता है।इस त्यौहार में भाइयों और बहनों के प्यार को दर्शाया गया है। इस दिन बहन ने अपने भाई की कलाई के चारों ओर ‘राखी’ नामक धागा बांध दिया। वह अपने भाई की सुरक्षा के लिए भगवान से प्रार्थना करती है और उसे अच्छे रास्ते तक ले जाती है। बदले में भाई उसे मिठाई देता है और उसे शुभकामनाएं देता है।

यहां हम छात्रों के लिए Essay on Raksha Bandhan in Hindi पर कुछ निबंध साझा करते हैं।

Essay on Raksha Bandhan in Hindi

 Essay on Raksha Bandhan in Hindi Under 100 Words

रक्षाबन्धन बड़ा स्नेह-भरा पवित्र त्यौहार है। इसे राखी (रखड़ी) भी कहते हैं। यह पर्व सावन | महीने की पूर्णमासी को मनाया जाता है। इसे श्रावणी भी कहते हैं।

इस दिन बहिने सुन्दर-सुन्दर वस्त्र पहनकर अपने | भाइयों के हाथ में राखी बांधती हैं। यदि भाई दूर हो तो लिफाफे में डाक द्वारा भेज देती हैं । भाई बहिन को कुछ देता है। बहिनें फूली नहीं समातीं। कई ब्राह्मण भी दूसरों के हाथ में राखी बांधते हैं। राखी | मौली की होती हैं। किनारी, रेशम, फूल, बिन्दी आदि से भी बनाई जाती हैं।

राखी के धागों में भाई-बहिन के स्नेह की भावना भरी हुई होती है।

कई बार किसी और को भाई बनाकर नारियां | राखी बांधती हैं। राजपूताने की एक रानी ने हुमायूं को राखो भेजकर अपने देश की रक्षा के लिए बुलाया था। यह प्राचीन पर्व है। इस दिन लोग जनेऊ बदलते हैं। यज्ञ करते हैं। अपने पवित्र ग्रन्थों को पढ़ते हैं। रक्षा-बन्धन को बड़े उत्साह से मनाना चाहिये ।

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Essay on Raksha Bandhan in Hindi Under 300 Words

 

भारत में बारहों महीने कोई…न-क्रोई त्योहार मनाया जाता है । हिंदूसमाज़ के चार प्रमुख त्यौहार हैं-‘ रक्षाबंधन है, ‘विजयादशमी’, ‘दीपावली’ और ‘होली’ । इन सब में रक्षाबंधन प्रमुख स्वीकार है । इसकी परंपरा अत्यंत प्राचीन है । प्राय: सभी जाति-वर्ग के लोग इसे समान रूप से मनाते हैं ।

रक्षाबंधन श्रवण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है । इसे ” श्रावणी’ भी कहते हैं । इसका ब्राह्मणों के लिए विशेष महत्त्व है । प्राचीन परंपरा के अनुसार ऋषि-मुनि यज्ञ करते थे । उस समय ऋषि…मुनि संबद्ध देश के राजा को अपनी धार्मिक क्रियाओं के लिए वचनबद्ध कराते थे । राजा उन्हें रक्षा का वचन देकर आशीर्वाद ग्रहण करते थे । इस दिन बहने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बाँधती हैं और बदले में भाई उनकी रक्षा का वचन देते हैं । यह मुख्यत: बहन-भाई का त्योहार है ।

मध्यकाल में लोगों का जीवन पहले की अस्ति सुखमय न था, तब अपनी रक्षा के लिए बहनें अपने भाई की कलाई में देशम के धागे का रक्षा-सूत्र (राखी) बाँधने लगी । मेवाड़ को महारानी कर्णावती ने बादशाह हुमायूँ को भाई मानकर अपनी रक्षा के लिए राखी भेजी थी । उस उदार मुगल शासक ने उसे स्वीकार किया था । इसकी एक बहुत ही रोचक कहानी है ।

लगभग चार सौ माल पहले की बात है । मेवाड़ के नरेश महाराणा संग्राम सिह की मृत्यु हो गई थी । उनकी मृत्यु के बाद कुमार विक्रमादित्य सिंहासन पर बेठे । उस समय विक्रमादित्य बहुत छोटे थे । उन दिनों मेवाड़ के सरदारों में आपसी फूट चरम पर थी । अपने लिए सही भीका जाकर गुजरात के शासक बहादुरशाह ने मेवाड़ पर आक्रमण कर दिया । उस विपदा के समय में भी राजमाता कर्णावती घबराई नहीं ।

उस समय दिल्ली में बादशाह हुमार्युका शासन था । महारानी कर्णावती ने उसके पास राखी और एक पत्र भेजा । पत्र में लिखा था-‘ ‘महाराज अब इस संसार में नहीं रहे । कुमार अभी बाल्यावस्था में हैं । राज्य में आपसी फूट है । गुजरात का शासक बहादुरशाह, जो कभी महाराज के शरणागतों में था, किले यर चढ़ आया है । में राखी भेज रही है । आप इसे स्वीकार कों ! आप महाराज के सिंहासन की रक्षा करें । में तो अपने धर्म को रक्षा अग्नि द्वारा कर स । है,

राखी और पत्र पते ही हुमायूँ ने अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लिया तथा उसने अपनी विशाल रोना के साथ मेवाड़ के लिए कुच किया ।

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Essay on Raksha Bandhan in Hindi Under 500 Words

 

रक्षा बंधन भाई बहन के प्रेम का त्योहार है। यह प्रत्येक वर्ष सावन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन बहन सुबह ही स्नान कर तैयार हो जाती है। इसके बाद वह थाली में आरती का सामान सजाकर भाई की आरती उतारती है और भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसके दाहिने हाथे की कलाई पर राखी बांध देती है। साथ ही भाई का मुंह मिठाईयों से भर देती है। भाई भी बदले में बहन को रूपये एवं अन्य उपहार देता है। भाई को राखी बांधते समय बहन की यह कामना रहती है कि मेरा भाई सुखी और ऐश्वर्यशाली बने। | और भाई बहन की रक्षा करने का वचन लेता है।

प्राचीन समय में राजपूत जब लड़ाई पर जाते थे तब महिलाएं उनको माथे पर कुमकुम तिलक लगाने के साथ साथ हाथ में रेशमी धागा भी बांधती थी। इस विश्वास के साथ कि यह धागा उन्हे विजयश्री के साथ वापस ले आएगा।

राखी के साथ एक और ऐतिहासिक प्रसंग जुड़ा हुआ है। मुगल काल के दौर में जब मुगल बादशाह हुमायूँ चितौड़ पर आक्रमण करने बढ़ा तो राणा सांगा की विधवा कर्मवती ने हुमायूँ को राखी भेजकर रक्षा वचन ले लिया। हुमायूँ ने इसे स्वीकार करके चितौड़ पर आक्रमण का ख्याल दिल से निकाल दिया और कालांतर में मुसलमान होते हुए भी राखी की लाज निभाने के लिए चितौड़ की रक्षा हेतु बहादुरशाह के विरूद्ध मेवाड़ की ओर से लड़ते हुए कर्मावती और मेवाड़ राज्य की रक्षा की।

रक्षा बंधन से संबंधित दूसरी घटना भी है, कि सिकंदर की पत्नी ने अपने पति के हिंदू शत्रु पुरूवास को राखी बांध कर अपना मुंहबोला भाई बनाया और युद्ध के समय सिकंदर को न मारने का वचन लिया। पुरूवास ने युद्ध के दौरान हाथ में बंधी राखी का और अपनी बहन को दिये हुए वचन का सम्मान करते हुए सिकंदर को जीवदान दिया।

ऐतिहासिक युग में भी सिंकदर व पोरस ने युद्ध से पूर्व रक्षा-सूत्र की अदला-बदली की थी। युद्ध के दौरान पोरस ने जब सिकंदर पर घातक प्रहार हेतु अपना हाथ उठाया तो रक्षा-सूत्र को देखकर उसके हाथ रूक गए और वह बंदी बना लिया गया। सिकंदर ने भी पोरस के रक्षा-सूत्र की लाज रखते हुए और एक योद्धा की तरह व्यवहार करते हुए उसका राज्य वापस लौटा दिया। यह है रक्षा बंधन का पवित्र भाव ।

रक्षा बंधन मानवीय भावों का बंधन है। यह प्रेम, त्याग और कर्तव्य का बन्धन है। इस बंधन में एक बार भी बंध जाने पर इसे तोड़ना बड़ा कठिन है। इन धागों में इतनी शक्ति है, जितनी लोहे की जंजीर में भी नहीं। जिस प्रकार हुमायूं ने इसी धागे से बंधे होने के कारण बहादुरशाह से लड़ाई की ठीक उसी प्रकार इस दिन हर भाई को यह प्रतिज्ञा करनी चाहिए कि वह अपने प्राणों की बाजी लगाकर भी बहन की रक्षा करेगा। यही रक्षा-बंधन पर्व का महान् संदेश है।

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