Diwali Essay in Hindi – आसान और सरल शब्दों में दीवाली पर निबंध

Short Essay on Diwali in Hindi

दीपावली का अर्थ है दीप + अवली अर्थात दीपों की पंक्ति। दीपावली प्रकाश का पर्व है। कार्तिक की अमावस्या को दीपावली का शुभ दिन आता है। इस काली रात को । दीप जलाकर उजियाला करके पूर्णिमा बना दिया जाता है।

इस दिन श्रीराम तामसी ताकतों का विनाश करके चौदह वर्ष बाद अयोध्या लौटे थे। लाखों दिए जलाकर उनका स्वागत किया गया था। इस दिन श्री गणेश और लक्ष्मी का पूजन भई किया जाता है। जिससे परिवार के कष्ट दूर हो व धन का आगमन हो। इस त्योहार के आने से पूर्व घर में सफाई करके साफ सुथरा किया जाता है। कहा जाता हैं लक्ष्मी, सफाई से ही आती है अभाव को कूड़े करकट के रुप में फेंक दिया जाता है। फिर दीप जलाकर प्रकाश किया जाता है। यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।

कहा जाता है कि खेतों की फसल कटकर घर आती है तो कृषक घर पर इस खुशी को गणेश लक्ष्मी का पूजन करते हैं और दीप जलाते हैं। इस पर्व पर लोग बाज़ार से खरीदारी करते हैं और एक दूसरे को मिठाई खिलाते हैं। कुछ लोग इसे गलत तरीके से मनाते हैं जुआ खेलते है शराब पीते है। ऐसा नहीं करना चाहिए बल्कि सबकी मंगल कामना करते हुए इस पर्व की गरिमा बनाए रखना चाहिए।

Diwali Essay in Hindi

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Diwali Essay in Hindi for Class 2

दीवाली’ हिन्दुओं का प्रसिद्ध त्यौहार है। दीवाली को दीपावली’ भी कहते हैं। दीपावली’ ।

का अर्थ होता है – दीपों की माला या कड़ी’। दीवाली प्रकाश का त्यौहार है। यह हिन्दू कैलेंडर के अनुसार आधिन माह में मनाया जाता है। दीवाली में लगभग सभी घर एवं रास्ते दीपक एवं प्रकाश से रोशन किये जाते हैं। दीवाली का त्यौहार मनाने का प्रमुख कारण है कि इस दिन भगवान राम, अपनी पत्नी | सीता एवं अपने भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष का वनवास बिताकर अयोध्या लौटे थे।

उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने तेल के दिए जलाकर प्रकाशोत्सव मनाया था। इसी कारण इसे ‘प्रकाश के त्यौहार’ के रूप में मनाते हैं। दीवाली के दिन सभी लोग खुशी मनाते हैं एवं एक-दूसरे को बधाईयाँ देते हैं। बच्चे। खिलौने एवं पटाखे खरीदते हैं। दुकानों एवं मकानों की सफाई की जाती है एवं रंग । पुताई इत्यादि की जाती है। रात्रि में लोग धन की देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं।

Diwali Essay in Hindi for Class 4

पर्व और त्योहार किसी भी जाति और राष्ट्र की सभ्यता और संस्कृति के प्रतीक होते हैं। ये त्योहार राष्ट्र में, लोगों के जीवन में स्फूर्ति प्रदान करते हैं। ये पर्व और त्योहार भी जाति के | गौरव के प्रतीक होते हैं। भारत में कश्मीर से कन्याकुमारी और राजस्थान से नेफा की ऊँचाइयों तक सैकड़ों त्योहार मनाए जाते हैं।

उत्तर भारत में दीपावली, वैशाखी, होली तथा जन्माष्टमी आदि त्योहार मनाए जाते हैं, तो दक्षिण में पोंगल का प्रसिद्ध त्योहार मनाया जाता है। यदि पूर्व में नवरात्रि और दुर्गापूजा की जाती है तो पश्चिम में राग-रागिनियों द्वारा तुलजा-भवानी की पूजा होती है। उत्तर भारत के प्रत्येक भारतीय के लिए दीपों का त्योहार दीपावली सबसे अधिक लोकप्रिय त्योहार है। यह बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्रीराम चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात् सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। श्रीराम के लौटने की खुशी में अयोध्यावासियों ने दीपक जलाए थे। उसी परंपरा के अनुसार आज भी लोग इस त्योहार को मनाते हैं।

दीपावली को आर्यसमाजी, जैनी और सिक्ख लोग भी मनाते हैं। इस दिन आर्यसमाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती ने महासमाधि ली थी। इस दिन जैन धर्म के तीर्थंकर महावीर स्वामी ने निर्वाण प्राप्त किया था। सिक्खों के छठे गुरु ने इसी दिन बंदीगृह से मुक्ति प्राप्त की थी। इस वर्ष भी, इस पर्व का आरंभ हमेशा की तरह घरों की सफाई और सफेदी से हुआ। इस सफाई अभियान में मैंने भी योगदान दिया। कई दिन पूर्व सफाई इत्यादि समाप्त हो चुकी थी और आ पहुँचा वह दिन जिसकी बड़ी प्रतीक्षा थी और जगमगा उठा नगर-नगर, डगर-डगर।

दीपावली के टिमटिमाते दीपकों से महँगाई के दिनों में भी हिंदू व सारा देश कितनी श्रद्धा और प्रेम से अपनी सांस्कृतिक संपदा का स्वागत करते हैं, यह देखते ही बनता है। न पटाखों की कमी, न मिठाइयों की दुकानों की कमी और न कमी हर्ष और उल्लास की। कम-से-कम उस दिन तो ऐसा लगा कि घर-घर में लक्ष्मी का पदार्पण हो चुका है। मैंने भी लक्ष्मी-पूजन में भाग लिया और सारी रात घर में उजाला रखा, ताकि कहीं अँधेरे की वजह से लक्ष्मी लौट न जाए। सभी लोगों की तरह मैं भी सजधजकर अपने मित्रों के साथ बाजार में घूमने गया और मिठाई, खिलौने, फुलझड़ियाँ और आतिशबाजी का सामान आदि खरीदा। कुछ लोग इस दिन जुआ भी खेलते हैं। मैं यह नहीं मानता कि जुआ | खेलना इस त्योहार के साथ परंपरागत रूप से जुड़ा हुआ है। मैं तो यह जानता हूँ कि इस दुर्व्यसन | से इस पर्व की पवित्रता नष्ट हो जाती है। भारतीय संस्कृति के महाप्रतीक इस त्योहार को विधिपूर्वक ही मनाया जाना चाहिए।

Diwali Essay in Hindi for Class 8

हिन्दू धर्म में यों तो रोजाना कोई न कोई पर्व होता है लेकिन इन पर्यों में मुख्य त्यौहार होली, दशहरा और दीपावली ही हैं। हमारे जीवन में प्रकाश फैलाने वाला दीपावली का त्यौहार कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। इसे ज्योतिपर्व या प्रकाश उत्सव भी कहा जाता है। इस दिन अमावस्या की अंधेरी रात दीपकों व मोमबत्तियों के प्रकाश से जगमगा उठती है।

वर्षा ऋतु की समाप्ति के साथ-साथ खेतों में खड़ी धान की फसल भी तैयार हो जाती है। दीपावली का त्यौहार कार्तिक मास की अमावस्या को आता है। इस पर्व की विशेषता यह है कि जिस सप्ताह में यह त्यौहार आता है उसमें पांच त्यौहार होते हैं। इसी वजह से सप्ताह भर लोगों में उल्लास व उत्साह बना रहता है। दीपावली से पहले धन तेरस पर्व आता है। मान्यता है कि इस दिन कोई-न-कोई नया बर्तन अवश्य खरीदना चाहिए। इस दिन नया बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। इसके बाद आती है छोटी दीपावली, फिर आती है दीपावली। इसके अगले दिन गोवर्द्धन पूजा तथा अन्त में आता है भैयादूज का त्यौहार। अन्य त्यौहारों की तरह दीपावली के साथ भी कई धार्मिक तथा ऐतिहासिक घटनाएं जुड़ी हुई हैं।

समुद्र-मंथन करने से प्राप्त चौदह रत्नों में से एक लक्ष्मी भी इसी दिन प्रकट हुई थी। इसके अलावा जैन मत के अनुसार तीर्थंकर महावीर का महानिर्वाण भी इसी दिन हुआ था। भारतीय संस्कृति के आदर्श पुरुष श्री राम लंका नरेश रावण पर विजय प्राप्त कर सीता लक्ष्मण सहित अयोध्या लौटे थे उनके अयोध्या आगमन पर अयोध्यावासियों ने भगवान श्रीराम के स्वागत के लिए घरों को सजाया व रात्रि में दीपमालिका की। | ऐतिहासिक दृष्टि से इस दिन से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं में सिक्खों के छठे गुरु हरगोविन्दसिंह मुगल शासक औरंगजेब की कारागार से मुक्त हुए थे। राजा विक्रमादित्य इसी दिन सिंहासन पर बैठे थे। सर्वोदयी नेता आचार्य विनोबा भावे दीपावली के दिन ही स्वर्ग सिधारे थे। आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानन्द तथा प्रसिद्ध वेदान्ती स्वामी रामतीर्थ जैसे महापुरुषों ने इसी दिन मोक्ष प्राप्त किया था। |

यह त्यौहार बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोगों द्वारा दीपों व मोमबत्तियाँ जलाने से हुए प्रकाश से कार्तिक मास की अमावस्या की रात पूर्णिमा की रात में बदल जाती है। इस त्यौहार के आगमन की प्रतीक्षा हर किसी को होती है। सामान्यजन जहां इस पर्व के आने से माह भर पहले ही घरों की साफ-सफाई, रंग-पुताई में जुट जाते हैं। वहीं व्यापारी तथा दुकानदार भी अपनी-अपनी दुकानें सजाने लगते हैं। इसी त्यौहार से व्यापारी लोग अपने बही-खाते शुरू किया करते हैं। इस दिन बाजार में मेले जैसा माहौल होता है। बाजार तोरणद्वारों तथा रंग-बिरंगी पताकाओं से सजाये जाते हैं। मिठाई तथा पटाखों की दुकानें खूब सजी होती हैं। इस दिन खील-बताशों तथा मिठाइयों की । खूब बिक्री होती है। बच्चे अपनी इच्छानुसार बम, फुलझड़ियां तथा अन्य आतिशबाजी खरीदते हैं। इस दिन रात्रि के समय लक्ष्मी पूजन होता है।

माना जाता है कि इस दिन रात को लक्ष्मी का आगमन होता है। लोग अपने इष्ट-मित्रों के यहां मिठाई का आदान-प्रदान करके दीपावली की शुभकानाएं लेते देते हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से भी इस त्यौहार का अपना एक अलग महत्व है। इस दिन छोड़ी जाने वाली आतिशबाजी व घरों में की जाने वाली सफाई से वातावरण में व्याप्त कीटाणु समाप्त हो जाते हैं। मकान और दुकानों की सफाई करने से जहां वातावरण शुद्ध हो जाता है वहीं वह स्वास्थ्यवर्द्धक भी हो जाता है। कुछ लोग इस दिन जुआ खेलते हैं व शराब पीते हैं, जोकि मंगलकामना के इस पर्व पर एक तरह का कलंक है। इसके अलावा आतिशबाजी छोड़ने के दौरान हुए हादसों के कारण दुर्घटनाएं हो जाती हैं जिससे धन-जन की हानि होती है। इन बुराइयों पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है।

 

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